इस्हाक़ बिन इस्माईल चिश्ती (बी.ई.), सज्जादा नशीन ख़्वाजा ग़रीबनवाज़, अजमेर

सूफ़ी याना रिसाला मिला, पहला ही शुमारा इतना अच्छा पेश किया गया कि दिल से पुरखुलूस दुआ निकलती है। ‘सूफ़ीयाना’ टाईटल ही इसके अंदर का हाल बयान करता है। रिसाले के मज़ामीन बहुत उम्दा और बेहतरीन है, जिनको पढ़कर लोगों के दिलों में सिराते मुस्तक़ीम पर चलने की ख़्वाहीश जाग उठेगी। मैं सिदक़े दिल से अल्लाह से दुआ करता हूं कि ‘सूफ़ीयाना’ बहुत ज़्यादा तरक़्क़ी करे और बुजूर्गानेदीन की तालीमात व इन्सानियत के इस मिशन में कामयाबी हासिल करे। आमीन!