अवधेश शर्मा शास्त्री, नई दिल्ली

मैंने ऐसी पत्रिका की कल्पना भी नहीं की थी, जैसी आपने प्रकाशित की है। धन्य हैं आप और आपकी सोच, जिसने अध्यात्म को इतने सुंदरता से प्रस्तुत किया है। सिर्फ एक अनुरोध है कि इसके कठीन उर्दू शब्द को हटाकर, आसान बोलचाल वाले शब्द दें या फिर मतलब भी साथ में दें।