ख़ुद तो मिट लूं, उन के पाने की नहीं मुश्किल मुझे। इश्क़ की गर्मी से पैदा, दिल में होगी जब ख़लिश, खिंच लेगी अपनी जानिब, देखना मंजि़ल मुझे।

(हज़रत जलालुद्दीन खि़ज्र रूमी र.अ.)