तु राज़ी रह मेरे मालिक…

तु राज़ी रह मेरे मालिक…

कलाम. हज़रत ख़्वाजा ग़रीबनवाज़ؓ तजुर्मा. दर्द काकोरवी चु मन पुर जुर्मो इस्यानम तुई ग़फ़्फ़ार या अल्लाह। चु मन बा ऐबो नुक़्सानम तुई सत्तार या अल्लाह। सरापा जुर्मो इसयां मैं, तु है ग़फ़्फ़ार या अल्लाह। सरासर ऐबो नुक्सां मैं, तु है सत्तार या अल्लाह। बख़्वाबे मस्तियो ग़फ़लत ज़े सर...
ये ज़मीं जब न थी…

ये ज़मीं जब न थी…

ये ज़मीं जब न थी, ये फ़लक जब न था, फिर कहां और कैसे थे ये मासिवा, कौन उल्टे भला, पर्दा असरार का, पूछ दिल से तू अपने, तो देगा सदा… ला इलाहा इल्लल्लाह। ला इलाहा इल्लल्लाह। जब ये ज़मीन न थी और ये आसमान भी न था, तो उस रब के अलावा बाक़ी कुछ कहां थे और कैसे थे। कौन बता...
हम्दो सना

हम्दो सना

हम्‍द बेहद हम्दो सना है तेरी, कौनो मकान वाले। एै रब्बे हर दो आलम, दोनो जहान वाले। बिन मांगे देने वाले, अर्शो क़ुरान वाले। गिरते हैं तेरे दर पर, सब आन बान वाले। बेशक़ रहीम है तू, रहमत निशान वाले।   यौमुल जज़ा के मालिक, ख़ालिक़ हमारा तू है। करते हैं तुझको सजदे,...