ख़्वाजा ग़रीबनवाज़ؓ  का नसब नामा

ख़्वाजा ग़रीबनवाज़ؓ का नसब नामा

पांच चिश्त हेरात के पास एक कस्बे का नाम चिश्त है। हज़रत अबू इसहाक़ शामी चिश्तीؓ की रूहानी मौजूदगी से ये कस्बा रूहानियत का मरकज़ बन गया। आप पहले बुजूर्ग हैं जिनके नाम के आगे चिश्ती लगा। आपके बाद इस सिलसिले आलिया के पांच जलीलुल कद्र मशायख, चिश्त ही में रहे। इन्हें पांच...
फ़रमाने पीर

फ़रमाने पीर

यहां हम ख़्वाजा ए चिश्तिया के मल्फूज़ात से फ़ैज़ हासिल करेंगे। मल्फूज़ात, सूफ़ीयों की जि़ंदगी के उस वक़्त के हालात और तालीमात का ख़जाना होती है। जिसे कोई ऐसे मुरीद ही लिख सकते है, जो ज़्यादा से ज़्यादा पीर की सोहबत से फ़ैज़याब हुए हों। इस बार हम हज़रत ख़्वाजा ग़रीबनवाज़...
चार तरकी ताज

चार तरकी ताज

  यहां हम ख्वाजा ए चिश्तिया के मल्फूज़ात से फ़ैज़ हासिल करेंगे। मल्फूज़ात, सूफ़ीयों की ज़िंदगी के उस वक्त क़े हालात और तालिमात का ख़जाना होता है। जिसे कोई ऐसे मुरीद ही लिख सकते है, जो ज्यादा से ज्यादा पीर की सोहबत से फ़ैज़याब हुए हो। इस बार हम हज़रत ख्वाजा निज़ामुद्दीन औलिया...