सबका ख़ुदा एक है…

सबका ख़ुदा एक है…

यहां हम सूफ़ी मख़्दूम यहया मुनीरीؓ के उन तालीमात का ज़िक्र करेंगे, जो आपने अपने खास मुरीद क़ाज़ी शम्सुद्दीनؓ को ख़त की शक्ल में अता की। दरअस्ल क़ाज़ी साहब आपकी खि़दमत में हाज़िर नहीं हो सकते थे, इसलिए आपसे इस तरह से (यानी ख़तो किताबत के ज़रिए) तालिम की दरख़्वास्त की थी। ये भी...