114 Surah Nas

114 Surah Nas

114. सूरे नास   بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَٰنِ الرَّحِيمِ अल्लाह के नाम से शुरू जो बहुत मेहरबान रहमत वाला   قُلْ اَعُوْذُ بِرَبِّ النَّاسِۙ۰۰۱ तुम कहो मैं उसकी पनाह में आया जो सब लोगों का रब (1) مَلِكِ النَّاسِۙ۰۰۲ सब लोगों का बादशाह (2) اِلٰهِ النَّاسِۙ۰۰۳ सब लोगों का ख़ुदा (3) مِنْ شَرِّ الْوَسْوَاسِ١ۙ۬ الْخَنَّاسِ۪ۙ۰۰۴ उसके [...]
113 Surah Falaq

113 Surah Falaq

113. सूरे फ़लक़   بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَٰنِ الرَّحِيمِ अल्लाह के नाम से शुरू जो बहुत मेहरबान रहमत वाला   قُلْ اَعُوْذُ بِرَبِّ الْفَلَقِۙ۰۰۱ तुम फ़रमाओ मैं उसकी पनाह लेता हूँ जो सुब्ह का पैदा करने वाला है (1) مِنْ شَرِّ مَا خَلَقَۙ۰۰۲ उसकी सब मख़लूक़ के शर से (2) وَ مِنْ شَرِّ غَاسِقٍ اِذَا وَقَبَۙ۰۰۳ [...]
112 Surah Ikhlas

112 Surah Ikhlas

112. सूरे इख्‍़लास   بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَٰنِ الرَّحِيمِ अल्लाह के नाम से शुरू जो बहुत मेहरबान रहमत वाला   قُلْ هُوَ اللّٰهُ اَحَدٌۚ۰۰۱ तुम फ़रमाओ वह अल्लाह है वह एक है (1) اَللّٰهُ الصَّمَدُۚ۰۰۲ अल्लाह बेनियाज़ है (2) لَمْ يَلِدْ١ۙ۬ وَ لَمْ يُوْلَدْۙ۰۰۳ न उसकी कोई औलाद और न वह किसी से पैदा हुआ (3) [...]
55 Surah Rahman

55 Surah Rahman

55. सूरे रहमान   بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَٰنِ الرَّحِيمِ अल्लाह के नाम से शुरू जो बहुत मेहरबान रहमत वाला   اَلرَّحْمٰنُۙ۰۰۱ रहमान ने (1) عَلَّمَ الْقُرْاٰنَؕ۰۰۲ अपने मेहबूब को क़ुरआन सिखाया (2) خَلَقَ الْاِنْسَانَۙ۰۰۳ इंसानियत की जान मुहम्मद को पैदा किया (3) عَلَّمَهُ الْبَيَانَ۰۰۴ माकाना व मायकून (जो हुआ और जो होने वाला है) का बयान [...]
56 Surah Waqiah

56 Surah Waqiah

56. सूरे वाकिया   بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَٰنِ الرَّحِيمِ अल्लाह के नाम से शुरू जो बहुत मेहरबान रहमत वाला   اِذَا وَقَعَتِ الْوَاقِعَةُۙ۰۰۱ जब होलेगी वह होने वाली (1) لَيْسَ لِوَقْعَتِهَا كَاذِبَةٌۘ۰۰۲ उस वक़्त उसके होने में किसी इन्कार की गुंजायश न होगी (2) خَافِضَةٌ رَّافِعَةٌۙ۰۰۳ किसी को पस्त करने वाली किसी को बलन्दी देने वाली [...]
59 Surah Hashr

59 Surah Hashr

59. सूरे हशर   بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَٰنِ الرَّحِيمِ अल्लाह के नाम से शुरू जो बहुत मेहरबान रहमत वाला   سَبَّحَ لِلّٰهِ مَا فِي السَّمٰوٰتِ وَ مَا فِي الْاَرْضِ١ۚ وَ هُوَ الْعَزِيْزُ الْحَكِيْمُ۰۰۱ अल्लाह की पाकी बोलता है जो कुछ आसमानों में है और जो कुछ ज़मीन में, और वही इज़्ज़त व हिकमत वाला है (1) [...]