तु राज़ी रह मेरे मालिक…

तु राज़ी रह मेरे मालिक…

कलाम. हज़रत ख़्वाजा ग़रीबनवाज़ؓ तजुर्मा. दर्द काकोरवी चु मन पुर जुर्मो इस्यानम तुई ग़फ़्फ़ार या अल्लाह। चु मन बा ऐबो नुक़्सानम तुई सत्तार या अल्लाह। सरापा जुर्मो इसयां मैं, तु है ग़फ़्फ़ार या अल्लाह। सरासर ऐबो नुक्सां मैं, तु है सत्तार या अल्लाह। बख़्वाबे मस्तियो ग़फ़लत ज़े सर...
जन्नत और दोज़ख़

जन्नत और दोज़ख़

जीवन दर्शन एक हज़रत से कुछ लोगों ने पूछा. जन्नत (स्वर्ग) और दोज़ख़ (नरक) क्या है? आपने उन्हें अगले दिन एक शिकारी के पास ले गए। वो शिकारी बहुत से जानवरों को शिकार करके लाया था, उन्हें मार डाला था। वहां का मंज़र उन लोगों को देखा नहीं गया और वहां से जाने लगे। जाते जाते हज़रत...
हयाते ख़िज़्र रूमीؓ

हयाते ख़िज़्र रूमीؓ

  ऐ जलालुद्दीन रूमी शाहؓ जाने अंजुमन। तेरी बज़्मे दिल में हैं, मस्नदनशीं ख़्वाजा हसनؓ। तेरी हस्ती बन गई है, यादे अस्लाफ़े कोहन। साया अफ़गन तुझ पे है, ज़िल्ले शाहे ज़मन। इश्क़़ की जल्वागरी अब तेरे अफ़साने में है। रौशनी ही रौशनी अब तेरे अफ़साने में है।   तेरे...
ऐलाने नबूवत के पहले

ऐलाने नबूवत के पहले

571ई.  असहाबे फ़ील के वाकिये के 55 दिन बाद, मौसमे बहार में 12 रबीउल अव्वल मुताबिक 20 अप्रैल को बरोज़ पीर, सुबह फजर के वक्त मक्का में आपकी विलादत हुई। आपके दादा हज़रत अब्दुल मुत्तलिब ने आपका नाम मुहम्मदﷺ  रखा। आपके वालिद (अब्बाहुजूर) हज़रत अब्दुल्लाहؓ का पहले ही वफ़ात हो...
मैं रब से बाक़ी मुझ से

मैं रब से बाक़ी मुझ से

(ईद मिलाद स्पेशल)   या साहेबल जमाल व या सय्यदिल क़मर मिउंवजहेकल मुनीरो लक़द नव्वरूल क़मर लायुमकेनश शनाओ कमा काना हक़्क़हू बाद अज़ ख़ुदा बुजूर्ग तुई कि़स्सा मुख़्तसर ऐ साहेबे जमाल! और आदमियों के सरदार! आप ही के रूए मुबारक के अनवार से चांद रौशन है। आपकी सारी तारीफ़ें बयान...
हुस्न व जमाल

हुस्न व जमाल

हज़रत हस्सान बिन साबितؓ फ़रमाते हैं. व अहसनो मिन्का लम तरा क़त्तो ऐनी व अजमलो मिन्का लम तलेदिन्नेसाओ ख़ुलेक़त मुबर्रा.अम.मिन कुल्ले ऐबिन कअन्नका क़द ख़ुलेक़त कमा तशाओ   हुजूरﷺ  से हसीनतर मेरी आंख ने कभी देखा ही नहीं और न कभी किसी मां ने आपसे जमीलतर पैदा किया है। आप की...