तौबा और अस्तग़फ़ार

तौबा और अस्तग़फ़ार

मगर जिसने तौबा कर ली और ईमान ले आया और अच्छे काम किया, तो अल्लाह ऐसे लोगों की बुराईयों को नेकियों में बदल देगा, और अल्लाह बड़ा बख्शनेवाला व बहुत मेहरबान है। (कुरान 25:70) मगर जिसने तौबा कर ली और ईमान ले आया और अच्छे काम किया, तो यक़ीनन वो फ़लाह व कामयाबी पाने वालों में...
मसलके दाता गंजबख़्शؓ

मसलके दाता गंजबख़्शؓ

हज़रत दाता गंजबख़्श अली हजवेरीؓ फ़रमाते हैं- दीने मुहम्मदी, दुनियाभर में सूफ़ीया किराम की बदौलत फैली। आज भी अगर इन्सान को सुकूने कल्ब चाहिए तो सूफ़ीयों की बारगाह में आना ही पड़ेगा। और ऐसा हो भी रहा है। लोग सूफ़ीयों की ख़ानक़ाहों में रब की तलाश कर रहे हैं और जो यहां नहीं आ...
शरीअ़त तरीक़त हक़ीक़त मारफ़त

शरीअ़त तरीक़त हक़ीक़त मारफ़त

ग़ौसुल आज़म मोहीउद्दीन अब्दुल का़दिर जिलानीؓ फ़रमाते हैं- मारफ़त ये है कि मकनुनात के पर्दों में जो मख़्फ़ी मआनी हैं और तमाम अशया में वहदानियत के मआनी पर और हर शय में इशारा के साथ हक़ के शवाहिद पर इत्तेला हो। हर एक फ़ानी के फ़ना में हक़ीक़त के इल्म का तदराक ऐसे वक़्त में...
हदीसे जिब्रईलؑ

हदीसे जिब्रईलؑ

हज़रत उमर फ़ारूक़ؓ फ़रमाते हैं कि एक रोज़ हुज़ूरﷺ  की बारगाह में एक सफेद कपड़े पहने, काले बालों वाला शख़्स हाज़िर हुआ। उसके चेहरे से सफ़र की थकान नज़र नहीं आ रही थी। हम में से कोई भी उसे पहचानता न था। वो शख़्स हुज़ूरﷺ  के सामने, जानू से जानू मिलाकर बैठ गया और हुज़ूरﷺ  से पूछा...
इश्क़ (दर्से मसनवी)

इश्क़ (दर्से मसनवी)

मसनवी मौलाना रूमी- सूफ़ीयाना हिकायात, अख़्लाकी तालीमात और आरिफ़ाना मकाशिफ़ात का वो नमूना है, जिसकी मिसाल नहीं मिलती। ख़ुद मौलाना रूमीؓ कहते हैं कि इसमें कुरान के राज़ छिपे हैं। जिस शख़्स की जान में मसनवी का नूर होगा, बाक़ी हिस्सा उसके दिल में ख़ुद ब ख़ुद उतर जाएगा।...
ज़िक्र अज़कार

ज़िक्र अज़कार

यहां हम सूफ़ी जलालुद्दीन खि़ज़्र रूमीؓ की तालीमात से फ़ैज़ हासिल करेंगे। आप ज़िक्र की बहुत तालीम फ़रमाते हैं। इसका पहला हिस्‍सा हम पढ़ चुके हैं, पेश है इसका दुसरा हिस्‍सा… इक़रा कुल्बा बिस्मिल्लाह सल्लल्लाहो वलहम्दोलिल्लाह हसबी रब्बी जल्लल्लाह मा फ़ी...